इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की वायु सेना के प्रमुख ने फारस की खाड़ी के अरब देशों को चेतावनी दी है कि यदि किसी देश ने अमेरिका को ईरान के खिलाफ अपने ठिकाने और सुविधाएँ प्रदान कीं, तो मध्य पूर्व में तेल भंडार की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। IRGC वायु सेना के कमांडर ने क्षेत्रीय देशों को सख्त शब्दों में चेतावनी देते हुए कहा कि यदि उनकी भूमि, भौगोलिक क्षेत्र या सैन्य ठिकानों का उपयोग ईरान के खिलाफ किया गया, तो उन्हें ऊर्जा सुरक्षा और तेल उत्पादन को अलविदा कहना पड़ सकता है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, जनरल मजीद मूसवी ने ईरानी जनता के नाम एक संदेश में कहा कि हाल ही में हम पर थोपे गए युद्ध को पचास दिनों से अधिक समय हो चुका है, और इन दिनों में ईरानी जनता ने सड़कों, मोर्चों और विभिन्न क्षेत्रों में मौजूद रहकर साबित कर दिया है कि ईरान की असली ताकत जनता का मजबूत संकल्प और अडिग समर्थन है। उन्होंने कहा कि वह स्वयं को इस राष्ट्र का एक साधारण सदस्य मानते हैं और जनता के धैर्य, दूरदर्शिता और दृढ़ता को सलाम करते हैं।
जनरल मूसवी ने कहा कि IRGC वायु सेना के जवानों ने चालीस दिन और रात तक लॉन्चरों पर डटे रहकर दुश्मन की शक्ति के घमंड को तोड़ दिया और मौजूदा सैन्य शांति के दौरान भी पूरी सतर्कता के साथ रक्षा तैयारियाँ जारी रखीं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान युद्धविराम के बाद भी दुश्मन की हर गतिविधि पर नजर रख रहा है और यदि दुश्मन ने फिर से किसी प्रकार की आक्रामकता की तो ईरान का जवाब इस बार अधिक कठोर, निर्णायक तथा दुश्मन को पछताने के लिए मजबूर करने वाला होगा। उन्होंने विशेष रूप से खाड़ी के दक्षिणी देशों को संबोधित करते हुए कहा कि जो देश अपनी भूमि, सैन्य अड्डे और सुविधाएँ अमेरिका और ईरान-विरोधी शक्तियों को दे रहे हैं, उन्हें चेतावनी दी जाती है कि यदि उनकी धरती से ईरान के खिलाफ हमला किया गया तो पूरे मध्य पूर्व में तेल उत्पादन और ऊर्जा सुरक्षा गंभीर खतरे में पड़ जाएगी।
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